सुरेश यादव
कार्यकारी जिलाध्यक्ष
राज्य अध्यापक संघ रतलाम
*********************************
आज अनुकम्पा नियम पर चर्चा ।
**********************************
सथियो सर्व विदित है की ,पुरे देश में 2005 से नविन पेंशन प्रणाली लागू की गयी है । जिसे हम अंशादायि पेंशन योजना भी कहते है ।
इस योजना या प्रणाली का सबसे बड़ा दुष्परिणाम मुझे यह नजर आया है की 2005 के बाद नियुक्ति किसी भी कर्मचारी की मृत्यु पर उस कर्मचारी के परिवार को जमाराशि के शतप्रतिशत भुगतान के अतिरिक्त कुछ आर्थिक लाभ नहीं मिलता ।कुल मिला कर 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियो की आकस्मिक मृत्यु पर उस पर आश्रित परिजनों के लिए यह पेंशन प्रणाली किसी काम की नहीं है ।जबकि पूर्व के कर्मचारी के आश्रित को परिवार पेंशन की पात्रता थी ।
राज्य सरकार के कर्मचारियों को कर्मचारी बिमा सह अल्पबचत योजना के द्वारा कुछ आर्थिक लाभ मिल जाता है ।
परंन्तु अध्यापक संवर्ग की इस मामले में स्थिति बहुत खराब है ।वर्ष 2005 में तात्कालिन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की केबिनेट ने अध्यापको के लिए समूह बिमा और मेडिक्लेम करवाने का निर्णय लिया था और ,सम्बंधित निकाय को यह कार्य सम्पादित करने की जिम्मेदारी तय की गयी ,परन्तु उस पर जमीनी काम कुछ नहीं हुआ ।ततपश्चात अध्यापक संवर्ग का गठन कर दिया गया । और यह मांमला ठंडे बस्ते में चला गया ।कालांतर में वर्तमान मुख्य मंत्री महोदय ने महोदय ने यह दोनों घोशनाये 12 जनवरी 2013 को की ।परंतु उस को अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका । हम अध्यापको की मांगे भी वेतन तक ही सिमित रह जाती है । हम अपने परिवार के प्रति उतने फ़िक्र मंद नजर नहीं आते ।यह बात तो बिमा मेडिक्लेम की हुई ।
परंतु अनुकम्पा नियम ,उसको तो हमारी सरकार सरल करे ।जैसा की आप सभी जानते है अध्यापक(शिक्षाकर्मी) संवर्ग के लिए अनुकम्पा नियुक्ति 2005 से तात्कालीन मुख्य मंत्री बाबूलाल गौर ने प्रारम्भ कि थी ।इसमें स्पष्ट है की अध्यापक के आश्रित को संविदा शिक्षक वर्ग 3 के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता है ।शायद आप को जानकारी होगी मध्य प्रदेश में कर्मचारियों या अधिकारियो के आश्रित को वेतन बेंड 5200-20400 में ग्रेड पे 2800 तक के पदों पर ही अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जाती है ।और जो आश्रित अनुकम्पा नियुक्ति से इनकार कर दे उसे कर्मचारी के अंतिम प्राप्त वेतन ,5 वर्ष तक प्रदान किया जाता है,यह सुविधा अध्यापक संवर्ग के लिए नही है ।जंहा राज्य सरकार के कर्मचारी के आश्रित को चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति की पात्रता है ।वन्ही अध्यापक के आश्रित को सिर्फ संविदा शिक्षक वर्ग 3 के पद पर नियुक्ति की ही पात्रता है ।इसके अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं ,संविदा शिक्षक वर्ग 3 के पद पर हर विभाग के कर्मचारी के आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जाती है ।
सथियो आप जानते ही है की ,देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू है इस कानून के कारण संविदा शिक्षक भर्ती के लिए प्रशिक्षण और पात्रता परीक्षा के साथ अहर्ताकारी परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता है और यह सब अनुकम्पा भर्ती पर भी लागू है।
सथियो सर्व विदित है की प्रदेश में विज्ञान सहायक संविदा शिक्षक को बिना प्रशिक्षण के भर्ती किया जाता है ,अनुत्तीर्ण गुरूजी को भी संविदा शिक्षक बनाया गया है और न्यूनतम अंक की कोई बाध्यता भी नहीं रही है।फिर अनुकम्पा में इतनी सख्ती क्यों इसमें शिथिलता क्यों नहीं ?
राज्य अध्यापक संघ ने 26 नंवम्बर,3 दिसम्बर ,23 दिअम्बर और 25 दि
सम्बर 2015 को अपने 12 सूत्रीय ज्ञापन में अंनुकम्पा भर्ती के लिए शिक्षा के अधिकार कानून की बाध्यता को शिथिल करने,राज्य के कर्मचारियों के समान 7 वर्ष तक अंतिम वेतन भुगतान करने और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्ति का विकल्प भी प्रदान करने की मांग सीधे मान्नीय मुख्य मंत्री जी से की है । आप सभी सथियो से निवेदन है की यह मांग अपने अपने ज्ञापन में सम्मिलित करें व राज्य के अन्य कर्मचारी संगठन भी इस मांग को प्रमुखता से अपने ज्ञापन में रखें ।
धन्यवाद ।
No comments:
Post a Comment