अगर देश के संविधान ने हर नागरिक को रोटी कपडा और मकान की गारंटी दी हैं तो वह हम अध्यापकों को क्यू हासिल नहीं होता क्यु 20 बर्षो से लगातार हमारा शोषण हो रहा है हर समय एक नई विसंगति से जुझना पड़ता है हम शिक्षक है और हम ही अपने अधिकारो से वंचित है तो प्रदेश के और लोगो का क्या हल होगा ।जब हमारा सामान कार्य सामान वेतन हमारा मुलभुत सिद्धान्त है तो क्यू हमें दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर किया जाता है
संविधान दिवस के लागु होने पर मुट्टी भर हुक्मरानो से यह पूछना आवश्यक हो गया ही की हमे अपना अधिकार मिलेगा की नहीं
आओ साथियो 27 जनवरी को शाम को 4 बजे मिलकर हल्ला बोले हमें अपना अधिकार चाहिए नहीं किसी से भीख चाहिए ।
विसंगति सुधार क कर 6 पे के आदेश जरी करने होंगे ।करने होंगे।
जिंदगी काँटो का सफ़र है
हौसला इसकी पहचान है
रास्ते पर तो सभी चलते है
जो रास्ते बनाये वही इंसान है..!!
आपका भाई
बृजेश शर्मा
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