सांदर वंदन
भाईयो शिक्षा मंत्री की अलग अलग बयानबाजी हमें संदेहास्पद प्रतीत हो रही है।ऐसा लग रहा हैकि मानो शासन हमें छटवे वेतनमान के रुप में चासनी में पोटेशियम सायनाइड मिलाकर देना चाहती है।इससे हमें सचेत रहने की आवश्यकता है।
शिक्षामंत्री जी के समाचार के अनुसार 5500 करोड़ रु की राशि छटवे वेतनमान के लिये आवश्यकता है।लेकिन जब आंदोलन चला था तब शिक्षामंत्री ने 2800 करोड़ रु का अतिरिक्त वित्तीय भार बताया था।और शिक्षा विभाग ने शासन को 5500 करोड़ रु की राशि का प्रस्ताव भी भेजा था
लेकिन यह समझ में नही आता है कि जब शासन के मंत्रियो को यह सारी जानकारी थी तो फिर 1125 करोड़ रु की राशि बजट में प्रस्तावित कैसे हो गये।क्या सरकार की कोई चाल तो नही ?या फिर अधिकारीयो की चाल? मुझे तो भाईयो यह शासन और अधिकारीयो का मिलकर दोनो का गेमप्लान लग रहा है। उस समय गुणनखण्ड और लघु.समा.का हिसाब लगाने वाले अध्यापक नेता क्यो नही समझ पाये जब बजट 1125 करोड़ रु का प्रस्तावित हुआ था ।कहीं ऐसा तो नही श्रेय लेने की होड़ और सम्मान की चाह में अध्यापक हितों को भूल गये थे।तभी कोई विसंगति उस समय दिखाई नही दे रही थी।बस सम्मान ही एकमात्र लक्ष्य था।
यदि शासन चाहे तो अभी भी संसोधन हो सकता हैकोई बहाना भी नही है क्योकि शासन हमें छटवा वेतनमान अप्रेल पेड म ई देना चाहती है तो इसके लिये फरवरी माह में होने वाले वित्तीय बजट में शेष राशि को प्रस्तावित कर सकती है।समझ में नही आता अध्यापको को वेतन देने के लिये क ई विभागो की अड़चने आ जाती है ।और मंत्रियो को अपना वेतन बढ़ाने के लिये किसी विभाग की कोई अड़चन नही आती।
लेकिन ये भी यह भी समझ में नही आता जब सरकार के मंत्रियो को पता था कि इतना वित्तीय भार आयेगा तो अधिकारियो ने घोषणा को पलट कैसे दिया ।यदि ऐसा है तो अब तक संबधित अधिकारीयो के खिलाफ कार्यवाही क्यो नही? ये समझ से परे है। ठीक इसी प्रकार 2013 मे जारी आदेश में अंतरिम राहत में विसंगति भी जानबूझकर की गई ।उस समय भी हमारे अलग अलग संघो ने विसंगति सुधरवाने हेतु भरसक प्रयास किये।आज दिनांक तक नही सुधर पाई।और सरकार ने अध्यापको मे फूट डालते हुये अपना काम कर दिया ।और फिर से वही चाल दोहरा दी।
क्यों सी एम साहब हमें बार बार धोखा दे रहे है? क्या हम उम्रभर आंदोलन आंदोलन ही खेलते रहेगे।कभी 6पे आंदोलन अब विसंगति सुधार आंदोलन,7पे आंदोलन फिर संविलियन आंदोलन ।क्या माननीय मुख्यमंत्री जी हमारा सारा बुढ़ापा आंदोलन में ही निकाल देना चाहते है।
तो फिर कुछ भाई क्यों स्वागत सम्मान की राह पर अडे़ हुये है । मैं पूछना चाहूगा उन अध्यापक नेताओ से जो स्वागत सम्मान के लिये इतने व्याकुल हो रहे है। जब हमारे 18 साथी शहीद हुये तब प्रदेश के सी एम साहब ने एक बार भी सहानुभूति व्यक्त की क्या ? यदि नही तो फिर आप इतने स्वागत सम्मान के लिये उतावले क्यो? जबाब दे इस बात का।
यदि समय रहते विसंगति दूर नही होती है। तो फिर अगला नया आयाम वेतन विसंगति सुधार आंदोलन का बिगुल बजेगा।
"हाथ जिनमें जुनून हो कटते नही तलवार से,
अगर विसंगति दूर नही हुई तो लडे़गे सरकार से"
-कौशल क्रांतिकारी चम्बल
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