सादर वंदन
प्रिय साथियो मैं जानता हूं कि मिट्टी के तेल में डूबे हुये अध्यापको में आजाद के चिंगारी फेकने से आग लग गई। ये वास्तव में प्रदेश के लाखो अध्यापकों के दिलो में लगी आग थी। जिसे संयुक्त मोर्चा ने मूर्तरुप देकर आंदोलन को सफल बनाया।जिसके कारण माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने 6टे वेतनमान देने हेतु विचार किया। लेकिन अब कुछ अध्यापक नेता कह रहे है।कि प्रांतीय टीम जल्द भोपाल में होगी।यदि ऐसा न कहते हुये ये कहा जाये कि संयुक्त मोर्चा की टीम जल्द ही भोपाल होगी । तो ज्यादा सार्थक होगा क्योकि विसंगति को दूर करवाना किसी एक संगठन का काम नही है।जो लोग ये कहते है।कि विसंगति रहित छटवा वेतनमान अध्यापक संवर्ग के लिये दूर की कोड़ी है। तो उनके मुंह से यह बात अच्छी नही लगती ।जब 2017 का समायोजन हम 2016 में करवा सकते है।तो विसंगति दूर होने में कोई बड़ी बात नही है।बशर्ते हम एक बैनर के नीचे हो।लेकिन साथ में हिम्मत और होंसला हो।हिम्मत से तूफान का रुख भी मुड़ जाता है।हिम्मत से गोवर्धन पर्वत भी उठ जाता है।हिम्मत से चट्टान भी हट जाती है।भाईयों होंसलों से उड़ान होती है पंखो से नही।
"हिम्मत से हवा के रुख को भी मोड़ सकते है,
हिम्मत से सूरज के ताप को भी सह सकते है,
कर ले चाहे कोई कितने ही बदलावों की कोशिशे,
हिम्मत से अपने अधिकार को भी पा सकते है।"
यदि जो संघ पहले विसंगति सुधार आंदोलन का बिगुल बजाता है तो उसके साथ सारे संगठनो को खुले मंच पर आ जाना चाहिये ।हम विघटित होकर नही बल्कि संगठित होकर ही अपनी ताकत का परिचय सही तरीके से दे सकते है।और मुझे पूरा यकीन है कि विसंगति भी दूर होगी क्योकि एकता में शक्ति निहित है।तो भाईयो विसंगति सुधार आंदोलन संयुक्त मोर्चा के बैनरतले हो।अब देखना यह है कि जोर किस संगठन में अधिक है जो सबसे पहले आंदोलन के लिये मैदान में आता है।फिर हम सभी को पूरे मनोयोग से उसका साथ देना है।चाहे परिस्थिति कुछ भी हो।या फिर सभी संघो को मिलकर एक साथ संयुक्त मोर्चा के बैनरतले आंदोलन का आगाज कर देना चाहिये।
हमारे कुछ साथी कह रहे है कि आदेश जल्दी हो उसके बाद संसोधन करालेगे।और कह रहे है बार बार विसंगति विसंगति चिल्ला रहे है।थोडा़ धैर्य रखो।तो मैं उन साथियों को कहना चाहुंगा कि धैर्य के कारण ही हम अन्य राज्यो के शिक्षकों से 10 साल पीछे हैऔर आदेश के संदर्भ में यह कहना चाहूगा कि आदेश के बाद संसोधन कराना काफी जटिल प्रक्रिया हो जाती है।हमें समय रहते इस समस्या को हल करना है।नहीं तो 2013 के इतिहास की पुनरावृति फिर से हो सकती है और रही बात विसंगति विसंगति चिल्लाने की तो यदि हम चिल्लाये नही शांत होकर हाथ पर हाथ रखकर बैठ रहे तो कोई नही सुनेगा बार बार चिल्लाने से हमें अपने साथियों में जोश भरना है और जागरुक करना है क्योकि इस लड़ाई में सबका योगदान अहम है।यदि आप उस इंसान की तलास कर रहे हो जो आपको आपके अधिकार दिलायेगा तो आप अपने को आईने में देखे।इसलिये बार बार चिल्लाना बहुत जरुरी है।आखिरी पंक्ति में खडे़ हुये एक एक अध्यापक को हमें अपनी आवाज सुनानी है।इतने दिनो में लगातार सभी संघो द्वारा ज्ञापन देने के बाबजूद माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी का विसंगति के संदर्भ में अभी कोई बयान न आना हमारी मुश्किले बढ़ाता है। इसका अब केवल एक ही विकल्प बचा है .........मुझे उम्मीद है आप समझ गये होगे।
हम माननीय मुख्यमंत्री जी के सम्मान समारोह का विरोध नही कर रहे ।यदि कोई सम्मान समारोह करता है।तो हम भी पूरे मनोयोग से उनके साथ है बस वो व्यक्ति इस बात की गारंटी छाती ठोककर ले ले कि सम्मान समारोह में 6टे वेतनमान की विसंगति दूर करवा देगे।ये मेरी गारंटी है।तो हम भी उसके साथ है।यदि ऐसा नही तो हम इसका विरोध करते है।
अब तो भाईयो अंतिम विकल्प केवल एक ही बचा है। जो आप सबके सामने है।इसलिये साथियो इस महायुध्द के लिये कमर कस सभी तैयार रहे।अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगा कि गुलाम बनकर जीओगे तो कुत्ता समझकर ठोकर मारेगी ये दुनियां और नबाब बनकर जीओगे तो सलाम ठोकेगी ये दुनियां ।फैसला आप करें साथियों।
"हम अपनी रक्त की एक एक बूंद बहा देगे,अपने अधिकार पाने को,
कोई भी संघ हमें जब भी आवाज दे,हम मैदान में कूद पड़ेगे मर मिटने को"
-कौशल क्रांतिकारी चम्बल
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