सादर वंदन
आयुक्त महोदय द्वारा नारी शक्ति के मातृत्व अधिकार की बलि देकर आज नारीशक्ति का घोर अपमान करके प्रदेश की महिला अध्यापकों में भारी रोष व्याप है।कहीं ऐसा न हो कि नारी कि चिंगारी आयुक्त महोदय पर भारी न पड़ जाये।इतिहास साक्षी है जब जब किसी ने नारियों का अपमान किया है तब तब वह काल के गाल ने निगल लिया है।क्या आयुक्त महोदय ये भूल गये कि प्रसव पीड़ा से कराहती मातृत्व कोख से जब किसी संतान का जन्म होता है तो उसके लालन पालन पोषण में कितनी पीड़ा और जिल्लतें नारी शक्ति को उठानी पड़ती है।मानवीय संवेदनाये,माननीय मातृत्व को इस तुगलकी फरमान के पैरों तले कुचलना महिलाओ की कोख से विभेद करना है।मैं आयुक्त महोदय को पूछना चाहूंगा कि महिलाओ की कोख में भी कोई अंतर होता है क्या..??यदि होता है तो अंतर स्पष्ट करें।अन्यथा समय रहते मातृत्व शक्ति मानवीय वेदनाओ मानवीय संवेदनाओं और कोख से निकलने वाली संतान की चीत्कार, उस निबोध संतान की करुणामयी पुकार ,माँ की ममता को दृष्टिकोण रखते हुये अपने तुगलकी फरमान को वापिस ले अन्यथा नारी की चिंगारी दावानल का रूप धारण कर सम्पूर्ण प्रदेश में सत्ता और सत्ता में बैठे अधिकारीयों को जलाकर भस्म कर देगी।
एक नारी की ममता की पुकार...
🙏 शकुन्तला तोमर🙏
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