सम्मानीय अध्यापक साथियो
शिक्षा क्रांति यात्रा लगभग आधे प्रदेश का सफर तय कर चुकी है. यात्रा को अध्यापको जनप्रतिनिधियो समाज के बुद्धिजीवी तबके का मिल रहा आपार समर्थन यह साबित करता है की शिक्षा का मुद्दा जनमानस को गहरे तक प्रभावित करता है और यह भी की इस निमित्त जो भी संघ संगठन ईमानदारी से लड़ाई लड़ेगा उसको जनता का प्रतिसाद अवश्य मिलेगा.
किसी समय शिक्षक समाज का बौद्धिक नेतृत्व करता था. किसी भी मुद्दे पर निष्पक्ष राय लेने के लिए समाज शिक्षको की ओर ही देखता था. शिक्षको की इसी भूमिका को ख़त्म करने के लिए सत्ता में बैठे निहित स्वार्थी तत्वों ने हमे रोजी रोटी के सवाल में ऐसा उलझा दिया की समाज का नेतृत्व तो दूर हम स्वयं पदनामो, सेवा शर्तों एवं अपने ही नेतृत्व के नाम पर बंट कर समाज की मुख्यधारा से दूर हट गए. करते भी क्या ? पेट का सवाल जो खड़ा कर दिया गया था. हम जब भी सड़को पर उतरे अपने और अपने परिवार के बच्चों के भविष्य के लिए उतरे इस सारी प्रक्रिया में गांव का वो मासाब कही खो गया जो अखबार पढ़कर गाँववालो सुनाता था तो उसकी बात किसी भी राजनैतिक या सामाजिक संगठन से ज्यादा स्वीकार्य थी. पट्टी पूजा के दिन बच्चों के साथ पालक भी शालाओ में उसका सम्मान करने आते थे शिक्षक की आयु को अनदेखा कर गुरु के रूप में चरण स्पर्श करते थे. सत्ताधीश और स्वार्थी तत्व अपनी साजिश में सफल रहे.
मगर आज हमने अपने संघर्ष, जीवटता और निरंतर प्रयासों से वेतन के मामले में लगभग सम्मानित स्थान प्राप्त कर लिया है किन्तु इस 17 सालो की पूरी प्रक्रिया में शिक्षा व्यवस्था अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई और आज इसपर निजीकरण के रूप में गम्भीर ख़तरा मंडरा रहा है.आज समाज को हमारे नेतृत्व की आवश्यकता है शिक्षा में नित नए प्रयोगों और निजीकरण के चलते प्रदेश में प्रदेश भर में अजीब बेचैनी का वातावरण है.अतः शिक्षको को जन सरोकार से जुड़े सामाजिक मुद्दों के लिए लड़ने का समय आ गया है. हम समाज को यह बताये की हमारी वेतन विसंगतियों और सेवा शर्तों का सीधा सम्बन्ध शिक्षा के सरोकारों से है इससे हमारी माँगो को सामाजिक स्वीकृति और वैधता मिलेगी. इस प्रकार अपने आंदोलन से समाज को जोड़कर हम सदभावना पूर्वक माहौल में अपनी मांगे मनवा सकते है क्योकि जनमत की उपेक्षा कोई भी सरकार नही कर सकती.
इसी जनमत को बनाने के उद्देश्य से शिक्षा क्रांति यात्रा पुरे प्रदेश में जारी है. इसका व्यक्तिगत सांगठनिक स्वार्थो के आधार पर विरोध अपने ही पैरो पर कुल्हाड़ी मारने के समान होगा. आशा ही वरन पूर्ण विशवास है की प्रदेश का एक एक अध्यापक इस महायज्ञ में अपनी ओर से आहुति देकर देश में शिक्षको की सनातन परम्परा का निर्वाह करेगा.
आपका
रिज़वान खान
सामान्य अध्यापक
शिक्षा क्रांति यात्रा आधे प्रदेश का सफर तय कर चुकी है: रिजवान खान
Thursday, 4 February 2016
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