सादर वंदन
साथियों,
हम सभी का अतीत हमारे साथ है,लेकिन बार बार अपने अतीत में लोटने की प्रवृति न तो स्वयं के लिये और न ही दूसरों के लिये शुभ है।परेशानी तब होती है,जब हम अतीत को अपने वर्तमान से जोड़ लेते है।इसके साथ क ई तरह की भ्रांतियां मन में पाल लेते है।
एक बहुत प्रसिध्द कहावत है-"भूतकाल बीत गया और भविष्य से हम अनजान है,इसलिये वर्तमान हमारे हाथ में है।"असल में वर्तमान हमारा है।वर्तमान हमें मिला हुआ सुनहरा मौका है।वर्तमान में जीने से सफलता और अपने उज्जवल भविष्य की संभावना सुनिश्चित होती है।जो सही है उसकी सराहना करनी चाहिये न कि उसका मखोल उडा़ना चाहिये।एक ही समाज के व्यक्तियों मे आज एक दुसरे के प्रति इतनी गंदगी भरी पडी़ है जिसकी कल्पना करना अंसभव है।जबकि "माफ करो और भूल जाओ "की नीति अपनानी चाहिये अन्यथा अतीत की यादे हमेशा सतायेगी।अतीत की घटनाओ को बार बार सोचना ,गड़े मुरदे उखाड़ने जैसा है।जिससे दुर्गन्ध फैलने के अतिरिक्त कुछ और प्राप्त कर पाना संभव नही है।
आज सच्चा आजाद वही है।जो अतीत की जंजीरों ,बंधनो से आजाद हो ।जो वर्तमान परिवेश में सबके साथ मिलकर आगामी भविष्य की योजना बनाये। तभी उसको सच्चा आजाद कहा जा सकता है।
संयुक्त मोर्चा जिंदाबाद
अध्यापक एकता जिंदाबाद
🙏कौशल क्रांतिकारी चम्बल🙏
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