आई टी सेल
राज्य अध्यापक संघ मध्यप्रदेश।
बहुत कठिन है डगर
संविलियन की
✍??✍??....... अध्यापक जगत में सोशल मीडिया के नाम से चल रही जुबानी जंग को देखकर लगता है कि हमारे कुछ संगठन व कुछ भाइयों की लड़ाई शासन से न होकर राज्य अध्यापक संघ व अपने साथियों से है। राज्य अध्यापक संघ कुछ करे तो परेशानी और कुछ न करे तो परेशानी। शायद इनका मकसद केवल साथियों के खिलाफ विषवमन कर हमारे भोले भाले साथियों को दिग्भ्रमित कर अध्यापक एकता अखंडता को खंडि कर कभी आम अध्यापक, कभी शोषित अध्यापक , कभी पीड़ित अध्यापक और न जाने कितने नामों से स्वयं को प्रतिपादित करते हुए अध्यापक संवर्ग के सामूहिक हितों को क्षति पहुचाते हुए व्यक्तिगत हित के चलते सोशल मीडिया पर जो चरित्र चित्रण किया जा रहा है वह बहुत ही शर्मनाक व हास्यास्पद है।
अभी तक ये सोशल मीडिया के नेता वास्तव में क्या एक वर्ष पूर्व तक अध्यापक हित हेतु निष्क्रिय थे या सो रहे थे और अब अचानक इतने सक्रिय क्यों? इन्हें अभी हाल ही ये पीड़ा व दुःख दर्द दिखाई दिया क्यों?
मैं ऐसे अध्यापक शुभ चिंतकों से आग्रह करता हु कि यदि वास्तव् में आप इतने अध्यापक हितैषी हैं तो शासन के खिलाफ लड़ते हुए आपने एक भी सुबिधा या कोई आर्थिक लाभ प्रदाय कराया हो तो बताएं...
और हां सोशल मीडिया से केवल सकारात्मक विचार रखते हुए लोगो को अपने अधिकार की लड़ाई के लिए जाग्रत करना गलत नही है, पर अपने ही साथियों के प्रति शिक्षक होते हुए अभद्र भाषा व अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना आपके संस्कार व आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को जरूर प्रतिपादित करता हैं कि आप किस मनोभाव से ग्रषित होकर आपा खो बैठे हैं। यदि आप वास्तविक अध्यापक शुभचिंतक हैं तो अध्यापक एकता के लिए आपकी ओर से सकरात्मक प्रयास के साथ कोई ठोस रणनीति हो तो उसके अनुरूप कुछ कर के दिखाएँ और अध्यापक एकता हेतु प्रयास करे। वैसे ही 2015 में बगैर किसी कारण के ऊल जलूल भाषा का प्रयोग कर अध्यापक एकता पर कुठाराघात कर हमारे मूल लक्ष्य शिक्षा बिभाग में संविलियन की राह कठिन होती जा रही है।
मेरा तो बस ऐसे साथियों से एक ही निवेदन है कि वर्तमान समय में हमारा लक्ष्य आपस में लड़कर एकता को खंडित करते हुए 11 से 12 भागों में बँटना नही है। शासन तो हमेशा ही हमारी एकता को खंडित करने हेतु सदैव कुटिल चाल चलकर हमें तोड़ने का प्रयास करती रही है और आज आलम यह है कि हम एक संघ से 12 संघों की स्थिति में पहुच गए हैं।
यदि अपनी ढपली अपना राग की राह पर इसी तरह चले तो यह कहना बिलकुल भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि-
"बहुत कठिन है डगर संविलियन की"
साथियों अभी देर नही हुई एक लक्ष्य -एक संघ क्यों नहीं?
सभी से निवेदन शिक्षकीय गरिमा का ध्यान रखते हुए अपने विचार पूर्ण शालीनता व सभ्यता के साथ रखकर अध्यापक हित में प्रयास करें।
सोशल मीडिया जंग ए मैदान नही है ये चरित्र चित्रण के साथ स्वतंत्र अभिव्यक्ति व वैचारिक आदान प्रदान का साधन है, किसी समस्या समाधान का साधन नही। इसीलिए आपसी मर्यादाओं व गरिमा का पालन करते हुए जनचेतना के साथ अपनी बात को प्रमुखता से रखने का प्रयास करें तभी हम माहौल तैयार करने के साथ साथ शासन पर अपनी मांगों की पूर्ती हेतु दबाव बनाने में सफल हो सकेंगे, नही तो आज जो माहौल है उससे भला होने की उम्मीद व कयास लगाना बेमानी होगा।
जागो अध्यापक जागो.....
अध्यापक हित में जारी.....
आपका अपना साथी-
सियाराम पटेल
प्रदेश मीडिया प्रभारी
राज्य अध्यापक संघ मध्यप्रदेश।
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