संघ ...संघ होता है ,..
कोई इससे बड़ा नहीं होता है ,
कायर बन कौम कलंकित करने से अच्छा ,
लड़कर मरना स्वीकार करे ...।
सरकार अध्यापक संवर्ग विशेषकर सहायक अध्यापको के शोषण के नित नए प्रतिमान स्थापित कर रही है
औरअध्यापको के संघ अविश्वसनीय होते जा रहे है ,?
तब लड़े कौन अड़े कौन ?
सोचिये विकल्प क्या है?
विश्वसनीय संघ ही विकल्प है ,।
आज तक के अध्यापको के संघर्ष मसहायक अध्यापको की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी ,सबसे कम लाभ रहा है ।
अब स्थिति यह है कि सहायक अध्यापको की विसंगतियां भी विशिस्ट है तब इनके लिए केवल और केवल इन्ही के लिए लड़ने वाले संगठित समूह की जरुरत है ।
सामान्य मार्गदर्शी मांगो के लिये अध्यापक संघ ठीक है किन्तु
सहायक अध्यापको की विशिस्ट विसंगति के लिएकेवल सहायक अध्यापको का संघ अनिवार्य हो जाता है ।
इसे अध्यापक संवर्ग के किसी विभाजन के रूप में न देखकर सरकार द्वारा बनाई जा रही समस्या के समाधान के रूप में देखना होगा ।
अब यहाँ मैं बात "सम्पूर्ण सहायक अध्यापक संवर्ग की कर रहा" हूँ।
1.शिक्षाकर्मी3 से बने सहायक अध्यापक ।
2.गुरूजी से बने सहायक अध्यापक /
3.संविदा से बने सहायक अध्यापक ।
इनकी भी मांगो में अंतर है लेकिन वह इतना बारीक और एक दूसरे से सम्बद्ध है की एक होने में कोई बाधा नहीं है ।
अध्यापको के लिए घोषित 6वा वेतन मान और उससे निकलने वाला शिक्षविभाग संविलियन का मार्ग प्रमुख है ।
⚡अनिवार्य मांग है की गुरुजिओ को नियुक्त दिनाक से सेवा गड़ना कर वरिष्ठता दी जाय।
⚡पुराने 98 ,01,03,के सहायक अध्यापको को क्रमोन्नति में पदोन्नति का वेतनमान दिया जाय।
⚡⚡सहायक अध्यापको के वेतन कीप्रारंभिक गड़ना 5200 की जगह7440 से की जाय ।
सब जायज मांगे है पूरी होनी चाहिए।
इसके लिए सरकार की चाटुकारिता नहीं बल्कि संतुलित समन्वय या शक्तिशाली संघर्स की जरूरत है ।
राज्य सहायक सहायक अध्यापक संघ हर स्थिति के लिए तैयार है । हमें सरकार से लड़कर जीतने लायक शक्ति तैयार करनी ही होगी ।
जिसके लिए हर जिले के हर सहायक अध्यापक तक पहुचाना है। कोई दूसरा आपके दर्द पर सहानुभूति दिखला सकता है किंतु आपके हिस्से का दर्द सह नहीं सकता ,इस स्वार्थी समाज में अपने हिस्से का संघर्ष खुद करना पड़ता है । सहायक अध्यापको की पीड़ा का अहसास सरकार और अध्यापक संघो के लिये शाब्दिक है कभी किसी अध्यापक संघ के लिए आत्मिक नहीं रहा है ।जिसका परिणाम अथाह विसंगतियों से बने सहायक अध्यापको के वेतन मान है ।अब भी वक्त है अध्यापक संघो की कहानी के अंदर की कहानी को अच्छे से समझ कर सहायकअध्यापको के अस्तित्व को बचाया जा सकता है ।
सहायक अध्यापको के लिए समर्पित राज्य सहायक अध्यापक संघ ,और इसके प्रमुख भाई सन्दर्भ सिंह बघेल जी से प्रदेश के सहायक अध्यपको की अंतिम आशा है ।
आप पहले भी लड़े है ,डटे है झुके नहीं ,फिर उन्ही तेवरो की जरूरत है ,।
हुंकार भरे संघर्ष का हम सहायक अध्यापक अब पीछे नहीं हटेंगे ।
सादर निवेदित -----
अखिल सिंह ,सहायक अध्यापक ,सतना
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